अंतर्राष्ट्रीय श्रवण संबंधी अक्षमता वाले व्यक्तियों के सप्ताह के अवसर पर जागरूकता रैली निकाली

कानों के स्वास्थ्य और सुनने की क्षमता की देखभाल संबंधी लोगों को किया जागरूक
होशियारपुर, 1 अक्टूबर 2026 (शैकी)
अंतर्राष्ट्रीय श्रवण संबंधी अक्षमता वाले व्यक्तियों के सप्ताह के अवसर पर सिविल सर्जन होशियारपुर डॉ. मनदीप कमल के दिशा-निर्देशों के अनुसार कानों के स्वास्थ्य, सुनने की क्षमता की देखभाल तथा सुनने संबंधी समस्याओं की समय पर पहचान और उपचार के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए सिविल सर्जन कार्यालय, होशियारपुर से जागरूकता रैली निकाली गई। रैली को सिविल सर्जन डॉ. मनदीप कमल द्वारा हरी झंडी दिखाकर रवाना किया गया।
इस अवसर पर ए.सी.एस. डॉ. तजिंदरपाल सिंह, ई.एन.टी. विशेषज्ञ डॉ. बलराज कौर, डॉ. राजवंत कौर और डॉ. गगनदीप कौर, जिला मास मीडिया अधिकारी रामनदीप कौर, स्वास्थ्य विभाग का स्टाफ, ए.एन.एम. ट्रेनिंग स्कूल होशियारपुर के समस्त ट्यूटर एवं विद्यार्थी तथा गुरु राम दास नर्सिंग स्कूल के विद्यार्थी उपस्थित थे। विद्यार्थियों द्वारा रैली में सक्रिय रूप से भाग लेते हुए लोगों को कानों के स्वास्थ्य संबंधी जागरूक किया गया।
रैली के दौरान विद्यार्थियों द्वारा कानों के स्वास्थ्य, सुनने की क्षमता की देखभाल, तेज शोर से बचाव, सुनने संबंधी समस्याओं की समय पर पहचान और उपचार संबंधी विभिन्न जागरूकता नारे लगाए गए। विद्यार्थियों द्वारा जागरूकता संदेशों वाली तख्तियां भी प्रदर्शित की गईं, जिनके माध्यम से लोगों को कानों के स्वास्थ्य के प्रति सचेत रहने और सुनने संबंधी किसी भी समस्या को नजरअंदाज न करने का संदेश दिया गया।
रैली के बाद सिविल अस्पताल के ओ.पी.डी. क्षेत्र में भी मरीजों और उनके परिजनों को कानों के स्वास्थ्य तथा सुनने संबंधी समस्याओं के बारे में विस्तारपूर्वक जानकारी दी गई। लोगों को बताया गया कि सुनने की क्षमता में कमी किसी भी उम्र में हो सकती है और इसकी समय पर पहचान करके उचित उपचार करवाना बहुत जरूरी है। विशेष रूप से बच्चों में सुनने संबंधी समस्याओं की जल्द पहचान होने से उनके बोलने, भाषा सीखने, पढ़ाई और समग्र विकास में मदद मिलती है।
इस अवसर पर ई.एन.टी. विशेषज्ञ डॉक्टरों द्वारा बताया गया कि कानों में दर्द, पानी या पस आना, सुनने में कमी, कानों में घंटी या अन्य आवाजें आना आदि लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। ऐसी स्थिति में बिना किसी विशेषज्ञ की सलाह के स्वयं उपचार करने के बजाय योग्य ई.एन.टी. विशेषज्ञ से संपर्क करना चाहिए।
लोगों को कानों की सफाई के संबंध में भी जागरूक करते हुए कहा गया कि कानों में माचिस की तीली, पिन, हेयरपिन या किसी अन्य नुकीली वस्तु का प्रयोग न किया जाए। बिना चिकित्सकीय सलाह के कानों में कोई दवा, तेल या अन्य पदार्थ डालने से भी बचना चाहिए। इसके अलावा बहुत तेज आवाजों और लंबे समय तक शोर के संपर्क में रहने से सुनने की क्षमता पर पड़ने वाले प्रतिकूल प्रभावों से बचने के लिए आवश्यक सावधानियां बरतने के लिए कहा गया।
बच्चों के माता-पिता से अपील की गई कि यदि बच्चे के सुनने या बोलने में देरी, आवाज पर प्रतिक्रिया न देना या सुनने संबंधी कोई अन्य असामान्यता दिखाई दे तो तुरंत विशेषज्ञ डॉक्टर से संपर्क किया जाए। समय पर जांच और आवश्यकता अनुसार उपचार से बच्चों के भाषाई और समग्र विकास में महत्वपूर्ण मदद मिल सकती है।
स्वास्थ्य विभाग द्वारा यह भी संदेश दिया गया कि सुनने संबंधी अक्षमता वाले व्यक्तियों के साथ सम्मान और संवेदनशीलता से व्यवहार किया जाए। उन्हें शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और सामाजिक जीवन में समान अवसर प्रदान करने के लिए परिवार और समाज की भूमिका महत्वपूर्ण है। आवश्यकता अनुसार श्रवण सहायक उपकरणों और अन्य स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ लेकर सुनने संबंधी समस्याओं वाले व्यक्तियों के जीवन की गुणवत्ता में सुधार लाया जा सकता है।
इस जागरूकता रैली का मुख्य उद्देश्य लोगों को यह संदेश देना था कि कानों के स्वास्थ्य को भी शरीर के समग्र स्वास्थ्य का महत्वपूर्ण हिस्सा समझा जाए, सुनने संबंधी समस्या के लक्षणों को नजरअंदाज न किया जाए और आवश्यकता पड़ने पर समय पर विशेषज्ञ डॉक्टर की सलाह ली जाए।
रैली के दौरान विद्यार्थियों द्वारा “शोर कम करें—सुनने की क्षमता बचाएं”, “कानों की जांच करवाएं—सुनने की क्षमता बचाएं” और “कानों की करें संभाल—सुनने की क्षमता रहे बहाल” जैसे जागरूकता नारों के माध्यम से लोगों को कानों के स्वास्थ्य के प्रति जागरूक किया गया।

