चंडीगढ़ में मेडिकल ऑफिसरों की भर्ती और कैडर व्यवस्था में प्रस्तावित बदलाव को लेकर पंजाब में राजनीतिक विरोध तेज हो गया है। आम आदमी पार्टी के पंजाब मीडिया इंचार्ज बलतेज पन्नू ने दावा किया है कि नए प्रावधान लागू होने से चंडीगढ़ में पंजाब का हिस्सा मौजूदा व्यवस्था की तुलना में कम हो सकता है।
पन्नू के मुताबिक प्रस्तावित व्यवस्था में करीब 40 प्रतिशत मेडिकल ऑफिसरों की सीधी भर्ती यूटी कैडर के तहत किए जाने का प्रावधान है, जबकि बाकी 60 प्रतिशत पद पंजाब और हरियाणा के बीच बांटे जाएंगे। उनका दावा है कि इस बदलाव के बाद पंजाब की हिस्सेदारी करीब 36 प्रतिशत तक सिमट सकती है।
पंजाब के हिस्से पर असर का दावा
बलतेज पन्नू ने इसे केवल भर्ती प्रक्रिया में बदलाव का मामला मानने के बजाय चंडीगढ़ में पंजाब की हिस्सेदारी से जुड़ा मुद्दा बताया। उन्होंने कहा कि चंडीगढ़ को पंजाब की राजधानी के तौर पर विकसित किया गया था और पंजाब के पुनर्गठन के बाद बनी प्रशासनिक व्यवस्था में पंजाब और हरियाणा के बीच 60:40 का अनुपात महत्वपूर्ण रहा है।
उनका आरोप है कि प्रस्तावित नए कैडर ढांचे से इस व्यवस्था पर असर पड़ सकता है और पंजाब का हिस्सा कम हो सकता है।
‘एक-एक करके कमजोर हो रहे पंजाब के अधिकार’
AAP नेता ने कहा कि चंडीगढ़ से जुड़े मुद्दों पर प्रस्तावित बदलाव को व्यापक संदर्भ में देखने की जरूरत है। उन्होंने आरोप लगाया कि समय के साथ पंजाब से जुड़े कई प्रावधानों और अधिकारों में बदलाव किए जा रहे हैं।
बलतेज पन्नू ने पंजाब यूनिवर्सिटी से जुड़े हालिया विवाद का भी जिक्र करते हुए दावा किया कि अलग-अलग फैसलों के जरिए पंजाब के हित प्रभावित हो रहे हैं। उन्होंने केंद्र सरकार और भाजपा से पूछा कि यदि पंजाब के हितों की रक्षा करना प्राथमिकता है, तो चंडीगढ़ में पंजाब की निर्धारित हिस्सेदारी कम करने वाला ढांचा क्यों प्रस्तावित किया जा रहा है।
60:40 व्यवस्था बनाए रखने की मांग
AAP ने मांग की है कि पंजाब और हरियाणा के बीच मौजूदा 60:40 व्यवस्था को बरकरार रखा जाए। पार्टी का कहना है कि अलग यूटी कैडर बनाने की व्यवस्था से पंजाब की हिस्सेदारी प्रभावित नहीं होनी चाहिए।
पन्नू ने कहा कि चंडीगढ़ से जुड़ी प्रशासनिक और कैडर व्यवस्था में बदलाव करते समय पंजाब पुनर्गठन से जुड़े पुराने प्रबंधों और पंजाब के अधिकारों को ध्यान में रखा जाना चाहिए।
केंद्र से ड्राफ्ट की समीक्षा की मांग
बलतेज पन्नू ने केंद्र सरकार से चंडीगढ़ हेल्थ सर्विस रूल्स 2026 के प्रस्तावित ड्राफ्ट की तत्काल समीक्षा करने की मांग की है। उन्होंने कहा कि नए नियमों को अंतिम रूप देने से पहले यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि पंजाब की हिस्सेदारी और पुनर्गठन के बाद बनी व्यवस्था पर प्रतिकूल प्रभाव न पड़े।
उन्होंने कहा कि पंजाब इस तरह के किसी भी बदलाव को स्वीकार नहीं कर सकता, जिससे चंडीगढ़ में उसका हिस्सा लगातार कम होता जाए।
हालांकि, प्रस्तावित नियमों का वास्तविक प्रभाव क्या होगा और पंजाब की हिस्सेदारी किस आधार पर निर्धारित होगी, यह अंतिम अधिसूचना और लागू किए जाने वाले प्रावधानों से स्पष्ट होगा।

